शनिवार, 5 सितंबर 2026

अमीर के लिए सेटलमेंट, आम आदमी के लिए वसूली एजेंट : देश में कर्ज माफी की दोहरी व्यवस्था

नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) ने हाल ही में एस्सेल ग्रुप और ज़ी एंटरटेनमेंट के संस्थापक डॉ. सुभाष चंद्रा से जुड़े व्यक्तिगत गारंटर दिवाला मामले में एक रेजोल्यूशन प्लान को मंजूरी दी है। मीडिया में इसे "22,006 करोड़ रूपए के कर्ज के बदले सिर्फ 6.5 करोड़ रुपए का सेटलमेंट" के रूप में रिपोर्ट किया गया,

🎭 सोच पर तंज, सच के साथ
"खबरों के बीच का तंज ही वह आईना है, जिसमें राजनीति की असली सूरत साफ दिखाई देती है।"

— TANJNAMA Editorial Desk

ताज़ा लेख एवं विश्लेषण

नवीनतम अपडेट (14 कुल लेख)
Kota राजस्थान का उभरता हुआ wildlife sanctuary केंद्र Data Story

Kota राजस्थान का उभरता हुआ wildlife sanctuary केंद्र

भारत में शायद ही कोई और शहर हो जिसके इतने नज़दीक तीन टाइगर रिजर्व और एक चीता पुनर्वास केंद्र एक साथ स्थित हों। इस तरह कोटा टाइगर + चीता + पक्षी + घास मैदान का अनोखा संयोजन पेश करता है। राजस्थान में इतने विविध वन्यजीव अनुभव एक शहर के इतने करीब कहीं और आसानी से नहीं मिलते।

 स्कूल ठीक करो... लेकिन मिड-डे मील पहले ठीक करो schoolआज का तंज

स्कूल ठीक करो... लेकिन मिड-डे मील पहले ठीक करो school

देश भर में “स्कूल ठीक करो” आंदोलन जोर-शोर से चल रहा है। बच्चे सड़कों पर हैं। नारे गूंज रहे हैं.इमारत ठीक करो, शौचालय ठीक करो, शिक्षक ठीक करो, किताबें ठीक करो। सब ठीक करो। लेकिन गत दिनों कोटा राजस्थान के एक स्कूल से जो खबर आई है, उसने साफ बता दिया कि सबसे पहले “मिड-डे मील ठीक करो” वाला नारा भूल गए हम सब।

GST संग्रह : दुकान बनाम डिजिटलData Story

GST संग्रह : दुकान बनाम डिजिटल

पारंपरिक व्यापार बनाम ई-कॉमर्स : प्रतिस्पर्धा या असमान मुकाबला? क्या पारंपरिक व्यापार ट्रेड हाशिये की तरफ जा रहा हैं?

सरकार का E20, जनता का 'Why 20?आज का तंज

सरकार का E20, जनता का 'Why 20?

E20 पेट्रोल को लेकर देश में बवाल लगातार बढता जा रहा है। बीते दिनों में जिस तरह से देश की राजधानी की सड़कों पर विरोधमार्च देख गया उससे यही लगता है कि आने वाले दिनों में एक बार फिर बड़ा आंदोलन हो सकता है।

प्रोपेगेंडा : AI और मोबाइल कैमरों के युग में संभव है?विश्लेषण

प्रोपेगेंडा : AI और मोबाइल कैमरों के युग में संभव है?

आज का युग सूचना और तकनीक का युग है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और हर हाथ में मौजूद स्मार्टफोन कैमरों ने राजनीति और शासन के पारंपरिक तरीकों को पूरी तरह बदल दिया है।

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